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सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वयसà¥à¤•ों में बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° 120/80 या उससे अधिक होता है। समसà¥à¤¯à¤¾ तब शà¥à¤°à¥‚ होती है जब यह नियंतà¥à¤°à¤£ से बाहर हो जाती है।
हृदय हमारे शरीर के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ à¤à¤¾à¤—ों में रकà¥à¤¤ पंप करता है। धमनियों से पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ होने पर जो दबाव होता है वह रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª है। हमारे बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° रीडिंग में दो à¤à¤¾à¤— होते हैं। पहला है सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° (बीपी रीडिंग में पहला अंक)। दूसरा है डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° (बीपी रीडिंग में दूसरा अंक)। सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° वह दबाव है जो तब पà¥à¤°à¤•ट होता है जब हृदय सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¤¾ है और रकà¥à¤¤ को धमनियों में धकेलता है। डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª वह दबाव है जो हृदय के फैलने और रकà¥à¤¤ से à¤à¤°à¤¨à¥‡ पर होता है। हृदय से शरीर के सà¤à¥€ à¤à¤¾à¤—ों में रकà¥à¤¤ के पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ के लिठकà¥à¤› दबाव की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। इसे सामानà¥à¤¯ रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कहते हैं।
कितना होना चाहिठबà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वयसà¥à¤•ों में बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° 120/80 या उससे अधिक होता है। समसà¥à¤¯à¤¾ तब शà¥à¤°à¥‚ होती है जब यह नियंतà¥à¤°à¤£ से बाहर हो जाती है। यदि यह 140/90 है तो यह मधà¥à¤¯à¤® बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° है, 160/100 से 180/100 मधà¥à¤¯à¤® हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° है, यदि यह 190/100 से 180/110 है तो यह गंà¤à¥€à¤° हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° है, 200/120 से 210/120 तेज है ( बहà¥à¤¤ गंà¤à¥€à¤°) हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° माना जाता है।
समय के साथ बढ़ने वाली परेशानी है बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°
उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कोई अचानक होने वाली समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं है। वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से धीरे-धीरे बढ़ रहा है। हो सकता है कि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ यह न पहचान पाठकि वह हाई बीपी के साथ जी रहा है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कई वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ के बावजूद उसमें कोई लकà¥à¤·à¤£ नहीं थे। बी.पी. अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• सà¥à¤¤à¤° की चिड़चिड़ापन, बार-बार सिरदरà¥à¤¦, चकà¥à¤•र आना और धà¥à¤‚धली दृषà¥à¤Ÿà¤¿ हो सकती है। दिल का दौरा और बà¥à¤°à¥‡à¤¨ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• जैसी गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं। सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से, हालांकि, कà¥à¤› बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का जलà¥à¤¦à¥€ पता लगाया जा सकता है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह और इलाज से इसे पूरी तरह से नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है।
कम नमक का सेवन:
कई अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ में उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª सोडियम से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है। अपने दैनिक दिनचरà¥à¤¯à¤¾ में कम नमक खाने से उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª को रोकने में मदद मिल सकती है। आमतौर पर यह सलाह दी जाती है कि लोग जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नमक का सेवन न करें। आम तौर पर à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिठकि वह दिन à¤à¤° में 2300 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® तक नमक का सेवनन करे। हालांकि, विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ है कि जो लोग à¤à¤• दिन में लगà¤à¤— 2,800 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® का सेवन करते हैं, और जो à¤à¤• दिन में 2,800 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® से अधिक का सेवन करते हैं, उनमें नमक के सेवन के कारण कम मातà¥à¤°à¤¾ में सोडियम का सेवन करने वालों की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में लकड़ी की बीमारी विकसित होने का 72 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ अधिक जोखिम होता है। मौका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है। सोडियम इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ को नमक के माधà¥à¤¯à¤® से शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करने से रोकने के अलावा, यह मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ का कारण बन सकता है।
पोटेशियम का सेवन बढ़ाà¤à¤‚
उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª वाले लोगों के लिठपोटेशियम à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पोषक ततà¥à¤µ है। आहार में पोटेशियम का सेवन शरीर में सोडियम के सà¥à¤¤à¤° को कम करने में मदद करता है। पà¥à¤°à¤¸à¤‚सà¥à¤•ृत, पैकेजà¥à¤¡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ सोडियम में उचà¥à¤š होते हैं। आहार को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ करने के लिठपोटेशियम की खà¥à¤°à¤¾à¤• लेने की सलाह दी जाती है। इनमें पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° साग, टमाटर, आलू, शकरकंद, केला, à¤à¤µà¥‹à¤•ाडो, नारà¥à¤¸à¤¿à¤¸à¤¸, नटà¥à¤¸, दूध और दही शामिल हैं।
धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ बंद
धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ और शराब से उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª का खतरा बढ़ जाता है। शोध से पता चलता है कि शराब के सेवन से उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª का खतरा 16 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ तक बढ़ जाता है। धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ और शराब रकà¥à¤¤ वाहिकाओं को पूरी तरह से नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकते हैं और यह रेम आपके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठहानिकारक है। साथ ही, à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ से पता चला है कि मà¥à¤‚हासे मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ और उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के खतरेको बढ़ा सकते हैं। हम इन सामगà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को कम करके उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª से बचा सकते हैं।
नियमित रूप से वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करें
हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। शोध से पता चला है कि सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहने और बीमारियों से बचाव के लिठरोजाना 30 से 45 मिनट वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करना बहà¥à¤¤ जरूरी है। उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के रोगियों के लिठयह महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। नियमित रूप से वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने से रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कम हो सकता है। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहने के लिठ40 मिनट पैदल चलने की आदत डालें।
आइठतनाव कम करें
उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª वाले लोगों के लिठअपने तनाव के सà¥à¤¤à¤° को कम करना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। काम पर, मानसिक दोलनों सहित विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में तनाव को कम किया जाना चाहिà¤à¥¤ नहीं तो जान को खतरा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है।
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